पीरियड्स के दौरान मूड स्विंग्स और मानसिक तनाव: समझें कारण और समाधान
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पीरियड्स के दौरान मूड स्विंग्स और मानसिक तनाव: समझें कारण और समाधान

By Dr supriya mathur | Mental Health Tips | Posted on Jan, 22 2026 | 3 min read

हर महिला के जीवन में पीरियड्स (Periods) का समय एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, लेकिन यह अक्सर मानसिक तनाव (Mental Stress) और मूड स्विंग्स (Mood Swings) का कारण बन सकता है। हार्मोनल बदलाव, शारीरिक अस्वस्थता, और मानसिक तनाव की स्थिति के बीच जटिल संबंध होता है। इस लेख में, हम आपको बताएंगे कि क्यों पीरियड्स के दौरान यह बदलाव होते हैं और कैसे आप इनसे निपट सकते हैं।

पीरियड्स के दौरान हार्मोनल बदलाव

हार्मोनल उतार-चढ़ाव का प्रभाव

पीरियड्स के दौरान, शरीर में हार्मोनल बदलाव आते हैं जो मूड स्विंग्स और मानसिक तनाव का प्रमुख कारण होते हैं। हार्मोनल बदलाव का असर शरीर के अलावा मानसिक स्थिति पर भी पड़ता है। जब हार्मोन (जैसे कि प्रोजेस्टरोन और एस्ट्रोजन) का स्तर बदलता है, तो यह आपकी भावनाओं, स्वभाव और विचारों पर प्रभाव डालता है।

एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टरोन का प्रभाव

मासिक धर्म के पहले और दौरान के दिनों में, महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन का स्तर गिरता है और प्रोजेस्टरोन का स्तर बढ़ता है। इस बदलाव के कारण चिड़चिड़ापन, घबराहट, थकान, और कभी-कभी अवसाद (Depression) भी हो सकता है।

मानसिक तनाव और मूड स्विंग्स के कारण

हार्मोनल उतार-चढ़ाव

हार्मोनल असंतुलन पीरियड्स के दौरान मूड स्विंग्स का मुख्य कारण है। यह असंतुलन आपके भावनात्मक और मानसिक स्थिति को प्रभावित कर सकता है, जिससे तनाव और घबराहट महसूस होती है।

शारीरिक असुविधा

पेट में ऐंठन, कमर दर्द और सिरदर्द जैसी शारीरिक समस्याएं मानसिक स्थिति को और खराब कर सकती हैं, जिससे तनाव और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ता है।

व्यक्तिगत और सामाजिक दबाव

कार्य, परिवार और अन्य जिम्मेदारियां भी मानसिक तनाव को बढ़ा सकती हैं, खासकर जब शरीर पहले से ही अस्वस्थ महसूस कर रहा हो। यह दबाव मानसिक स्थिति को और बिगाड़ सकता है।

स्वस्थ आहार और मानसिक तनाव को नियंत्रित करने के उपाय

सही आहार का महत्व

एक स्वस्थ आहार (Healthy Diet) मानसिक तनाव को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। पीरियड्स के दौरान निम्नलिखित खाद्य पदार्थों का सेवन आपको शारीरिक और मानसिक रूप से बेहतर महसूस करवा सकता है:

  • फल और सब्जियाँ – विटामिन और खनिजों से भरपूर आहार शरीर और मन को सशक्त बनाता है।
  • ओमेगा-3 फैटी एसिड – यह अवसाद और तनाव को कम करने में मदद करता है, जो मछली, अलसी, और अखरोट में पाया जाता है।
  • चॉकलेट – इसमें ट्रीप्टोफैन होता है, जो मूड को बेहतर बनाता है।

तनाव प्रबंधन के उपाय

इसके अलावा, तनाव प्रबंधन (Stress Management) के उपाय भी ज़रूरी हैं, जो मानसिक स्थिति को बेहतर करने में सहायक होते हैं।

नियमित व्यायाम और मानसिक स्थिति

व्यायाम का मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव

नियमित व्यायाम (Regular Exercise) न केवल शरीर को तंदरुस्त रखता है, बल्कि यह मानसिक स्थिति को भी सकारात्मक बनाए रखता है। व्यायाम से एंडोर्फिन का स्राव होता है, जो मूड को बेहतर करता है और तनाव को कम करता है। योग और ध्यान (Meditation) भी मानसिक शांति और संतुलन बनाए रखने के लिए प्रभावी उपाय हैं।

पर्याप्त नींद और मानसिक तनाव का समाधान

नींद का महत्व

पर्याप्त नींद (Adequate Sleep) न केवल शारीरिक स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है, बल्कि यह मानसिक तनाव को भी कम करने में मदद करता है। पीरियड्स के दौरान, जब शरीर अधिक थका हुआ महसूस करता है, तो नींद में सही गुणवत्ता का होना महत्वपूर्ण है।

मानसिक तनाव के उपचार के लिए विशेषज्ञ की सलाह

जब विशेषज्ञ की सलाह की आवश्यकता हो

अगर पीरियड्स के दौरान मूड स्विंग्स और मानसिक तनाव अधिक बढ़ जाए, तो यह उचित होगा कि आप एक विशेषज्ञ से सलाह लें। चिकित्सक आपकी स्थिति का आकलन कर, व्यक्तिगत उपचार योजना तैयार कर सकते हैं।

निष्कर्ष

पीरियड्स के दौरान मूड स्विंग्स और मानसिक तनाव से जूझना सामान्य है, लेकिन यह पूरी तरह से नियंत्रण में लाया जा सकता है। हार्मोनल बदलाव, स्वस्थ आहार, नियमित व्यायाम, और पर्याप्त नींद की आदतों से आप इन समस्याओं से निपट सकते हैं। अपने मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य का ध्यान रखें और आवश्यकता महसूस होने पर विशेषज्ञ की मदद लें।

Frequently Asked Questions

जी हां, पीरियड्स के दौरान तनाव को नियंत्रित किया जा सकता है। इसके लिए स्वस्थ आहार, व्यायाम, और योग जैसे उपाय मददगार साबित हो सकते हैं।

जी हां, यह पूरी तरह से सामान्य है। हार्मोनल बदलाव के कारण मानसिक तनाव और मूड स्विंग्स हो सकते हैं।

हाँ, पर्याप्त नींद लेना बेहद जरूरी है, क्योंकि यह मानसिक और शारीरिक दोनों रूपों में स्वास्थ्य बनाए रखने में सहायक है।

मूड स्विंग्स हार्मोनल बदलाव, जैसे एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन के स्तर में उतार-चढ़ाव के कारण होते हैं, जो मानसिक और शारीरिक बदलावों को प्रभावित करते हैं।

टेंशन से हार्मोनल असंतुलन बढ़ सकता है, जिससे मूड स्विंग्स, दर्द और मानसिक थकान जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं।

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